रामनगर, उत्तराखंड: संयुक्त चिकित्सालय में उपकरणों की कमी से आंखों के ऑपरेशन रुके, मरीज परेशान

रामनगर, उत्तराखंड: संयुक्त चिकित्सालय में उपकरणों की कमी से आंखों के ऑपरेशन रुके, मरीज परेशान

#रामनगर (उत्तराखंड) के रामदत्त जोशी संयुक्त चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। अस्पताल में आंखों के ऑपरेशन के लिए आवश्यक उपकरणों, विशेष रूप से फेको मशीन और अन्य महत्वपूर्ण मशीनों की कमी के कारण मरीजों के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. विनोद टंटा ने बताया कि पांच से अधिक मशीनों की खरीद के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अभी तक मशीनें अस्पताल में नहीं पहुंची हैं। इस कमी के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां ऑपरेशन के लिए 15,000 से 40,000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं, जबकि सरकारी अस्पताल में यह सुविधा मुफ्त उपलब्ध होनी चाहिए।

इसके अलावा, अस्पताल में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी भी मरीजों की परेशानी का कारण बनी हुई है। पहले यह अस्पताल पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में संचालित हो रहा था, लेकिन 1 अप्रैल 2025 से यह पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में आ गया है। इसके बावजूद, संसाधनों की कमी और विशेषज्ञ चिकित्सकों की अनुपस्थिति के कारण मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन जैसी सुविधाओं के लिए भी निजी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक और मानसिक परेशानी बढ़ रही है।

स्थानीय लोगों और मरीजों ने अस्पताल की बदहाल स्थिति पर रोष जताया है। कई मरीजों को इलाज के लिए हल्द्वानी या अन्य बड़े शहरों में रेफर किया जा रहा है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही उपकरणों और स्टाफ की कमी को पूरा करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, लेकिन अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं दिख रही है।

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अतिरिक्त जानकारी:
– पृष्ठभूमि: रामनगर का संयुक्त चिकित्सालय कुमाऊं और गढ़वाल के प्रवेश द्वार पर स्थित है, और यह छोई, बैलपड़ाव, पीरूमदारा, ढिकुली, कानिया, मरचूला, मोहान, और सुंदरखाल जैसे दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए महत्वपूर्ण है।
– पीपीपी मोड से हटने का प्रभाव: अस्पताल को पीपीपी मोड से हटाकर सरकारी नियंत्रण में लाने के बाद भी व्यवस्थाएं सुधर नहीं पाई हैं। 2020 में पीपीपी मोड शुरू होने के बाद से ही अस्पताल में अव्यवस्थाएं, प्रशिक्षित डॉक्टरों की कमी, और संसाधनों की खराब स्थिति की शिकायतें थीं।  
– वर्तमान स्थिति: स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा ने अप्रैल 2025 में अस्पताल का निरीक्षण किया था और दावा किया था कि 70% व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली गई हैं, लेकिन मरीजों का कहना है कि स्टाफ और उपकरणों की कमी अब भी बरकरार है।  
– मरीजों की शिकायतें: मरीजों ने बताया कि ऑपरेशन थिएटर में माइक्रोस्कोप और अन्य उपकरणों की कमी के कारण मोतियाबिंद और अन्य नेत्र सर्जरी रुकी हुई हैं। इससे गरीब मरीजों को विशेष रूप से परेशानी हो रही है, जो निजी अस्पतालों का खर्च वहन नहीं कर सकते।  

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