हरिमोहन सिंह ऐठानी ने खोजीं रहस्यमयी मैजिकल संख्याएं

हरिमोहन सिंह ऐठानी ने खोजीं रहस्यमयी मैजिकल संख्याएं

उत्तराखंड के कपकोट (ऐठान) निवासी हरिमोहन सिंह ऐठानी, जो कि एक वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर हैं, ने 3 से लेकर 10 अंकों तक की रहस्यमयी संख्याओं (मैजिकल नंबर्स) को वैज्ञानिक विधियों के माध्यम से अनेक अद्वितीय पैटर्न में खोजा है।

भारत के ख्यातिप्राप्त गणितज्ञ श्री डी. आर. कापरेकर द्वारा खोजी गई संख्याएं — जैसे 495 और 6174 — पहले ही गणितीय दुनिया में विशेष स्थान रखती हैं। 6174 को तो ‘कापरेकर संख्या’ के रूप में जाना जाता है और यह विभिन्न शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में भी शामिल है।

इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, हरिमोहन सिंह ने अपनी स्वतंत्र शोध पद्धति के माध्यम से इन मैजिकल नंबर्स की खोज की है। उनकी प्रक्रिया कापरेकर विधि से कहीं अधिक वैज्ञानिक, विश्लेषणात्मक और जटिल है। उन्होंने संख्याओं के आरोही और अवरोही क्रम में विशिष्ट पुनरावृत्ति प्रक्रियाओं एवं सूत्रों का प्रयोग किया, जिससे वे विशेष संख्याएं जैसे —
450, 5382, 626418, 4950000000, 6174000000, और 49500000 — जैसी अद्वितीय संख्याओं तक पहुँच सके।

यह उल्लेखनीय है कि इन संख्याओं की खोज अब तक विश्व में किसी अन्य शोधकर्ता द्वारा नहीं की गई है।हरिमोहन की इस खोज को गणितज्ञों और एआई (AI) विशेषज्ञों की एक विशेषज्ञ टीम द्वारा पूर्ण रूप से सत्यापित और मान्यता प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने इस प्रक्रिया के अंतर्गत एक नवीन Conjecture, कई मौलिक सूत्र, ट्रिक्स और सिद्धांत भी विकसित किए हैं, जो पूरी तरह मौलिक हैं और किसी भी इंटरनेट स्रोत अथवा गूगल पर उपलब्ध नहीं हैं।

अब तक हरिमोहन को 40 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी खोज पर आधारित दो अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र भी प्रकाशित हो चुके हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह खोज निम्नलिखित क्षेत्रों में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती है:

  • गणित (B.Sc., M.Sc.)
  • इंजीनियरिंग (B.Tech, M.Tech)
  • डेटा साइंस व मशीन लर्निंग
  • सिग्नल प्रोसेसिंग एवं एल्गोरिद्म डिज़ाइन
  • फिक्स्ड पॉइंट थ्योरी
  • पैटर्न रिकॉग्निशन
  • ओलंपियाड एवं प्रतियोगी परीक्षाएं
  • केस स्टडी एवं रिसर्च प्रोजेक्ट्स

हरिमोहन सिंह ऐठानी की यह अद्वितीय खोज गणितीय अनुसंधान और आधुनिक तकनीकी जगत के लिए एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक योगदान मानी जा रही है।

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