रामनगर में स्लाटर हाउस खोलने को लेकर सभासदों और ठेकेदार के बीच विवाद, दोनों पक्षों ने दी कोतवाली में तहरीर

रामनगर में स्लाटर हाउस खोलने को लेकर सभासदों और ठेकेदार के बीच तीखा विवाद, कोतवाली में दर्ज हुई तहरीर

रामनगर, नैनीताल (30 मई, 2025, शाम 5:33 बजे): उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर में प्रस्तावित स्लाटर हाउस को लेकर स्थानीय सभासदों और ठेकेदार के बीच विवाद ने जोर पकड़ लिया है। इस मुद्दे ने शहर में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है, जिसके बाद दोनों पक्षों ने रामनगर कोतवाली में एक-दूसरे के खिलाफ तहरीर दर्ज कराई है। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

विवाद की जड़

रामनगर में एक स्लाटर हाउस के निर्माण और संचालन का ठेका हाल ही में एक स्थानीय ठेकेदार को दिया गया था। यह स्लाटर हाउस शहर के बाहरी इलाके में प्रस्तावित है, लेकिन सभासदों का एक समूह इसका पुरजोर विरोध कर रहा है। सभासदों का कहना है कि स्लाटर हाउस का स्थान रिहायशी इलाकों और स्थानीय बाजार के करीब है, जिससे स्वच्छता, बदबू और पर्यावरणीय प्रदूषण की समस्या पैदा हो सकती है। इसके अलावा, उन्होंने ठेके की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं, दावा करते हुए कि स्थानीय लोगों से इसकी सहमति नहीं ली गई।

दूसरी ओर, ठेकेदार का कहना है कि स्लाटर हाउस पूरी तरह से वैध है और सभी नियमों का पालन किया गया है। ठेकेदार ने सभासदों पर काम में बाधा डालने और धमकी देने का आरोप लगाया है।

कोतवाली में तहरीर और तनाव

विवाद के बाद सभासदों और ठेकेदार ने एक-दूसरे के खिलाफ रामनगर कोतवाली में तहरीर दी है। सभासदों ने अपनी तहरीर में आरोप लगाया कि स्लाटर हाउस का निर्माण अवैध रूप से और बिना स्थानीय सहमति के शुरू किया गया है। उन्होंने इसे पर्यावरण और सामाजिक समस्याओं का कारण बताया। वहीं, ठेकेदार ने अपनी तहरीर में कहा कि सभासदों ने उनके कर्मचारियों को धमकाया और निर्माण स्थल पर हंगामा किया, जिससे परियोजना में देरी हो रही है। ठेकेदार ने दावा किया कि सभी अनुमतियां प्राप्त हैं और यह परियोजना स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी।

दोनों पक्षों के बयान

सभासदों के एक प्रतिनिधि ने कहा, “यह स्लाटर हाउस हमारे घरों और बाजार के पास बनाया जा रहा है। इससे गंदगी और बदबू की समस्या होगी। प्रशासन ने बिना हमारी राय लिए यह ठेका दे दिया, जो गलत है। हम चाहते हैं कि इसकी निष्पक्ष जांच हो।”

ठेकेदार ने जवाब में कहा, “सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गई हैं। यह परियोजना रोजगार पैदा करेगी और शहर के विकास में योगदान देगी। कुछ सभासद राजनीतिक कारणों से इसका विरोध कर रहे हैं और मेरे कर्मचारियों को डरा रहे हैं।”

स्थानीय लोगों का रुख

स्थानीय निवासियों में इस मुद्दे को लेकर मतभेद है। कुछ लोग स्लाटर हाउस को पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए खतरा मानते हैं। एक निवासी ने कहा, “हमारे बच्चों और बुजुर्गों को इसकी वजह से परेशानी होगी। प्रशासन को पहले हमसे बात करनी चाहिए थी।” वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि यह परियोजना आर्थिक लाभ लाएगी और इसका विरोध अनुचित है।

प्रशासन का हस्तक्षेप

रामनगर कोतवाली के प्रभारी ने बताया, “दोनों पक्षों की तहरीर मिली है, और हम मामले की जांच कर रहे हैं। स्लाटर हाउस से जुड़े सभी दस्तावेजों की पड़ताल की जाएगी। हम शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” प्रशासन ने इलाके में अतिरिक्त पुलिस तैनात की है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

राजनीतिक कोण

इस विवाद ने स्थानीय राजनीति को भी गर्मा दिया है। विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ पार्टी पर ठेकेदार को अनुचित लाभ देने का आरोप लगाया है, जबकि सत्तारूढ़ पार्टी ने इन आरोपों को निराधार बताया है। एक स्थानीय नेता ने कहा, “यह परियोजना पारदर्शी तरीके से शुरू की गई है। विरोध केवल राजनीतिक लाभ के लिए हो रहा है।”

सोशल मीडिया पर हलचल

सोशल मीडिया पर इस मुद्दे ने व्यापक चर्चा छेड़ दी है। कुछ लोग सभासदों के समर्थन में हैं, जबकि अन्य ठेकेदार के पक्ष में बोल रहे हैं। कुछ पोस्ट में इस मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश भी की गई है, जिसे प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। लोगों से अफवाहों से बचने और शांति बनाए रखने की अपील की गई है।

अगला कदम

प्रशासन ने एक जांच कमेटी गठित करने का फैसला किया है, जो स्लाटर हाउस के स्थान, पर्यावरणीय प्रभाव और ठेके की प्रक्रिया की जांच करेगी। साथ ही, दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी पक्ष को कानून तोड़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

यह विवाद रामनगर में एक बड़ा मुद्दा बन गया है, और इसका समाधान प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण है। स्लाटर हाउस के निर्माण और संचालन पर अंतिम फैसला जांच के नतीजों और स्थानीय लोगों की राय पर निर्भर करेगा।

स्रोत: स्थानीय प्रशासन, कोतवाली में दर्ज तहरीरें, और स्थानीय लोगों के बयान।

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