नैनीताल के रामनगर में गौजानी कब्रिस्तान विवाद ने पकड़ा जोर

नैनीताल के रामनगर में गौजानी कब्रिस्तान विवाद ने पकड़ा जोर

रामनगर, नैनीताल (30 मई, 2025): उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर क्षेत्र में गौजानी कब्रिस्तान को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। 16 बीघा जमीन को लेकर उपजा यह विवाद अब और गहरा गया है, जिसके चलते इलाके में तनाव का माहौल है। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी संख्या में पुलिस और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की तैनाती की है।

विवाद की जड़

गौजानी में स्थित 16 बीघा जमीन को वक्फ बोर्ड अपनी संपत्ति बताता रहा है। मुस्लिम समुदाय का दावा है कि 1993 के एक समझौते के आधार पर यह जमीन कब्रिस्तान का हिस्सा है और इसका उपयोग दफनाने के लिए किया जाता रहा है। दूसरी ओर, स्थानीय लोग और कुछ भाजपा कार्यकर्ता इस दावे को खारिज करते हैं। उनका कहना है कि यह जमीन कब्रिस्तान का हिस्सा नहीं है। इस भूमि की वर्तमान बाजार कीमत कई करोड़ रुपये आंकी जा रही है, जिसके कारण यह विवाद और संवेदनशील हो गया है।

शव दफनाने को लेकर हंगामा

हाल ही में एक मुस्लिम व्यक्ति के शव को दफनाने के लिए जब समुदाय के लोग गौजानी कब्रिस्तान पहुंचे, तो वहां मौजूद कुछ लोगों ने इसका विरोध किया। इस विरोध में भाजपा नेता मदन जोशी और दिनेश मेहरा सहित अन्य स्थानीय लोग शामिल थे। विरोध के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई, और दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कुछ लोगों ने कब्र खोदने की प्रक्रिया को भी बाधित करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।

भाजपा नेताओं का पक्ष

भाजपा नेता मदन जोशी ने इस मामले में कहा, “यह जमीन कब्रिस्तान की नहीं है। हमारा विरोध केवल इसलिए है क्योंकि इस जमीन पर गलत दावे किए जा रहे हैं। हम चाहते हैं कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और सच्चाई सामने आए।” वहीं, दिनेश मेहरा ने कहा, “हम किसी के धार्मिक अधिकारों का विरोध नहीं कर रहे, लेकिन जमीन का मालिकाना हक स्पष्ट होना चाहिए। वक्फ बोर्ड का दावा बिना सबूत के नहीं माना जा सकता।”

मुस्लिम समुदाय का दावा

मुस्लिम समुदाय के लोगों ने दावा किया कि यह जमीन लंबे समय से कब्रिस्तान के रूप में उपयोग की जाती रही है। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “1993 के समझौते में यह साफ है कि यह जमीन कब्रिस्तान के लिए दी गई थी। अब इसे विवादित बनाना गलत है। हम अपने धार्मिक अधिकारों का सम्मान चाहते हैं।” समुदाय के लोगों ने इस घटना को “अमानवीय” करार देते हुए कहा कि शव को दफनाने से रोकना उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।

वक्फ बोर्ड की समाप्ति और विवाद का नया मोड़

हाल ही में वक्फ बोर्ड से संबंधित कानून में बदलाव और इसकी समाप्ति की चर्चाओं ने इस विवाद को और हवा दी है। वक्फ बोर्ड के दावों को लेकर पहले से ही कई जगहों पर विवाद चल रहे हैं, और गौजानी का यह मामला भी उसी कड़ी का हिस्सा बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वक्फ बोर्ड के दावों की सच्चाई की जांच होनी चाहिए, जबकि मुस्लिम समुदाय का मानना है कि यह उनकी धार्मिक भावनाओं पर हमला है।

प्रशासन की भूमिका

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की। रामनगर पुलिस और एसएसबी की टीमें मौके पर तैनात की गई हैं ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। नैनीताल के जिला मजिस्ट्रेट ने कहा, “हम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। दोनों पक्षों से बातचीत की जा रही है, और जमीन के मालिकाना हक को लेकर दस्तावेजों की जांच की जाएगी। 

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